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म्यूचुअल फंड बनाम फिक्स्ड डिपॉजिट

म्यूचुअल फंड बनाम फिक्स्ड डिपॉजिट

एक जागरुक इन्वेस्टर होने के नाते, आपको हमेशा विवरण की जांच करनी चाहिए और अलग-अलग कारकों की तुलना करने के बाद अपने इन्वेस्टमेंट की रणनीति बनानी चाहिए. इन्वेस्ट करते समय वायरल समाचार लेखों या वर्तमान मार्केट ट्रेंड की लहर में बह जाना बहुत आसान होता है, पर यह बहुत जरूरी है कि इन्वेस्ट करने से पहले आप अपनी खुद की ज़रूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता का मूल्यांकन कर लें.

प्रचलित इन्वेस्टमेंट साधनों के रूप में, फिक्स्ड डिपॉजिट​ और म्यूचुअल फंड ने विभिन्न इन्वेस्टर्स को आकर्षित किया हैं. अगर आपको यह तय करने में मुश्किल हो रही है कि फिक्स्ड डिपॉजिट या म्यूचुअल फंड में से कौन-सा इन्वेस्टमेंट बेहतर रहेगा, तो यह जरूरी है कि आप अपने विकल्पों को ठीक से परखें और उसी अनुसार निर्णय लें.

यहां, हम बुनियादी प्रश्न पूछकर दोनों इन्वेंस्टमेंट की तुलना करेंगे, ताकि आप यह तय कर सकें कि आपके लिए कौन सा विकल्प सबसे अच्छा है.

Q1. म्यूचुअल फंड क्या है?

  • म्यूचुअल फंड वह है जहां कई इन्वेस्टर अपना पैसा बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर एक साथ अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं.
  • इक्विटी, बॉन्ड्स, मनी मार्केट साधनों और/या दूसरी सिक्योरिटीज़ में इन्वेस्टमेंट किया जाता है.
  • फिर इन इन्वेस्टमेंट के जरिए हुई आमदनी को इन्वेस्टर में बराबर बांट दिया जाता है. यह बंटवारा खर्चों की कटौती के बाद किया जाता है.

 

Q2. फिक्स्ड डिपॉजिट क्या है?

  • फिक्स्ड डिपॉजिट में, इन्वेस्टर के समूह द्वारा पैसे एकत्र नहीं किए जाते हैं. इसके अलावा, जैसा कि नाम से पता चलता है, इसमें निश्चित समयावधि के लिए धन को जमा रखकर ब्याज़ प्राप्त होता है.
  • यह अवधि आमतौर पर एक वर्ष से पांच वर्ष तक होती है.
  • फिक्स्ड डिपॉजिट फायदेमंद होते हैं क्योंकि भुगतान ब्याज़ दर सेविंग अकाउंट की तुलना में अधिक होती है.
  • मेच्योरिटी अवधि पूरी होने पर मूल राशि के साथ ब्याज़ भी दिया जाता है.
  • आप फिक्स्ड डिपॉजिट में न्यूनतम डॉक्यूमेंटेशन के साथ कम से कम रु. 25,000 तक इन्वेस्ट कर सकते हैं.

 

यह भी पढ़ें: फिक्स्ड डिपॉजिट क्या है?

 

Q3. कोई कितने समय तक इन्वेस्ट किया हुआ रह सकता है?

  • आपने कौन-से प्रकार का फंड चुना है इस आधार पर म्यूचुअल फंड में लॉक-इन पीरियड हो सकता है, और आप जब चाहें तब इसे छोड़ सकते हैं. इसी प्रकार, फिक्स्ड डिपॉजिट में भी, आप अपने पैसे को 1–5 वर्षों के लिए जमा रख सकते हैं.
  • लेकिन, चाहे आप म्यूचुअल फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट का विकल्प चुनते हैं, आपको जरूर पता होना चाहिए कि अगर आप बहुत कम समय (एक साल से भी कम) का विकल्प चुनते हैं, तो आपको कुछ नुकसान उठाना पड़ेगा.
  • म्यूचुअल फंड के मामलों में, साल पूरा होने से पहले आपके द्वारा कमाये गए लाभ पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. फिक्स्ड डिपॉजिट के मामलों में, अगर अर्जित ब्याज़ रु. 10,000 से अधिक हो जाता है, तो इस राशि पर 10% की दर से टैक्स (TDS) काटा जाता है.
  • म्यूचुअल फंड में पूंजी के मूल्यह्रास से बचने के लिए लंबी अवधि के लिए इन्वेस्ट करना अधिक विवेकपूर्ण है.

 

Q4. इसमें किस सीमा तक सुरक्षा शामिल है?

  • जब आप एक सार्वजनिक क्षेत्र, निजी बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC ) में FD खोलने के लिए जाते हैं, तो आपको, पहले ही मेच्योरिटी पर मिलने वाली ब्याज़ दर के बारे में बता दिया जाता है.
  • लिखित ब्याज़ दर की गारंटी होती है और इसे बदला या परिवर्तित नहीं किया जा सकता है.
  • हालांकि आपको म्यूचुअल फंड से फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में ज्यादा ब्याज़ मिल सकता है लेकिन कोई गारंटी नहीं है कि यह लगातार स्थिर रहेगा. फिक्स्ड डिपॉजिट से बिलकुल अलग, म्यूचुअल फंड के फायदे सदा एक जैसे नहीं रहते.
  • ऐसा इसलिए है क्योंकि इक्विटी म्यूचुअल फंड शेयर मार्केट में अस्थिरता के अधीन हैं. इसलिए, सभी म्यूचुअल फंड स्पष्ट रूप से बताते हैं कि म्यूचुअल फंड में इंवेस्टमेंट बाज़ार और अन्य जोखिमों के अधीन है.
  • आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना चाहते हैं या फिक्स्ड डिपॉजिट में, ये पसंद केवल आपकी जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करती है.

 

अगर आप एक सुरक्षित, कम जोखिम वाले इन्वेंस्टमेंट की तलाश में हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट का चयन करना बेहतर है बजाज फाइनेंस फिक्स्ड डिपॉजिट स्थिरता और निश्चित रिटर्न के साथ फिक्स्ड डिपॉजिट की सर्वश्रेष्ठ ब्याज़ दरें प्रदान करता है.के साथ स्थिर और निश्चित रिटर्न देता है. ये बहुत आसान ऑनलाइन अकाउंट खोलने की सुविधा भी प्रदान करते हैं.