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कार्यशील पूंजी क्या है?

कार्यशील पूंजी मूल रूप से छोटी अवधि में किसी भी संगठन की फाइनेंशियल स्थिति बताती है और इसकी संपूर्ण क्षमता के आकलन में मदद करती है. मौज़ूदा एसेट से वर्तमान देनदारियों को घटाकर कार्यशील पूंजी प्राप्त की जाती है. यह अनुपात यह दिखाता है कि शॉर्ट टर्म के लोन के लिए कंपनी के पास पर्याप्त एसेट है या नहीं.

कार्यशील पूंजी, दैनिक खर्चों को संचालित करने के लिए कंपनी के लिक्विडिटी स्तर के बारे में बताती है और इन्वेंटरी, नकद, देयता अकाउंट, प्राप्ति अकाउंट और छोटी अवधि के क़र्ज़ आदि को कवर करती है. कार्यशील पूंजी, कंपनी के कई परिचालनों जैसे कि, क़र्ज़ और इन्वेंटरी संचालन, सप्लायर भुगतान और राजस्व संग्रह आदि से निकाली जाती है.

अब हम समझ गए हैं कि कार्यशील पूंजी क्या है, तो आइए इसके विभिन्न प्रकार और स्रोतों को समझते हैं, जहां से आप अपनी कंपनी के लिए कार्यशील पूंजी जमा कर सकते हैं.

कार्यशील पूंजी के स्रोत क्या हैं?

यह कार्यशील पूंजी के स्रोत लम्बी अवधि, लघु अवधि या स्वैच्छिक हो सकते हैं. स्वैच्छिक कार्यशील पूंजी मुख्य रूप से व्यापारिक क्रेडिट से ली गई है, जिसमें भुगतान योग्य नोट्स और बिल शामिल हैं, जबकि अल्पकालिक कार्यशील पूंजी स्रोतों में लाभांश या टैक्स प्रावधान, कैश क्रेडिट, सार्वजनिक डिपॉजिट ,ट्रेड डिपॉजिट,अल्पकालिक लोन, बिल छूट, इंटर -कॉर्पोरेट लोन और कमर्शियल पेपर भी शामिल हैं.

लंबी अवधि के लिए कार्यशील पूंजी स्रोतों में दीर्घकालिक लोन, डेप्रिशिएशन के प्रावधान, लाभ, डिबेंचर और शेयर पूंजी शामिल होती है. यह संगठनों के लिए उनकी आवश्यकताओं के आधार पर कार्यशील पूंजी के प्रमुख स्रोत हैं.
 

कार्यशील पूंजी के प्रकार क्या हैं?

वर्तमान में कार्यशील पूंजी के प्रकार बैलेंस शीट या ऑपरेटिंग साइकिल व्यू के आधार पर. बैलेंस शीट व्यू, कार्यशील पूंजी को निवल कार्यशील पूंजी (मौजूदा देयता को कंपनी की बैलेंस शीट में शामिल मौजूदा एसेट से घटाया जाता है) और सकल कार्यशील पूंजी (बैलेंस शीट में मौजूदा संपत्ति) में वर्गीकृत करता है.

सकल कार्यशील पूंजी

सकल कार्यशील पूंजी, कंपनी की वर्तमान एसेट की कुल वैल्यू होती है. इसमें कैश, प्राप्ति वाले अकाउंट, इन्वेंटरी, शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट और मार्केट में खरीदी बेची जाने वाली सिक्योरिटीज़ शामिल हैं. सकल कार्यशील पूंजी कंपनी के वास्तविक फाइनेंशियल हेल्थ को नहीं दर्शाती हैं, क्योंकि इसमें मौजूदा देनदारियां शामिल नहीं होती हैं. कंपनी की वास्तविक फाइनेंशियल हेल्थ का अनुमान मौजूदा एसेट और वर्तमान लायबिलिटी के बीच अंतर की गणना करके किया जा सकता है. यह अंतर वह वास्तविक कार्यशील पूंजी होती है जिससे कंपनी को अपने दायित्वों को पूरा करना होता है.

निवल कार्यशील पूंजी

निवल कार्यशील पूंजी, सकल कार्यशील पूंजी (कंपनी की वर्तमान एसेट) और वर्तमान देनदारियों के बीच का अंतर होती है. धनात्मक कार्यशील पूंजी दर्शाती है कि एसेट उन देयताओं से अधिक हैं. इससे पता चलता है कि कंपनी अपनी वर्तमान दायित्वों को पूरा करने के लिए बेहतर स्थिति में है. हालांकि, नकारात्मक कार्यशील पूंजी, एसेट से अधिक देयताओं को दर्शाती है. इससे पता चलता है​ कि कंपनी, फाइनेंशियल डिस्ट्रेस का सामना कर रही है.

यहां, सकल कार्यशील पूंजी और निवल कार्यशील पूंजी के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है कि सकल कार्यशील पूंजी हमेशा मात्रात्मक होती है, इसकी वैल्यू हमेशा धनात्मक होगी. जबकि निवल कार्यशील पूंजी गुणवत्तापूर्ण होती है, इसकी वैल्यू ऋणात्मक या धनात्मक, दोनों हो सकती है.

दूसरी ओर, ऑपरेटिंग साइकिल व्यू कार्यशील पूंजी को अस्थायी (निवल कार्यशील पूंजी और स्थायी कार्यशील पूंजी के बीच अंतर) और स्थायी (फिक्स्ड एसेट) कार्यशील पूंजी में वर्गीकृत करता है. अस्थायी कार्यशील पूंजी को आरक्षित और नियमित कार्यशील पूंजी में भी बांटा जा सकता है. चुने गए व्यू के आधार पर ये कार्यशील पूंजी के प्रकार हैं.

कार्यशील पूंजी चक्र

कार्यशील पूंजी की साइकिल या WCC का अर्थ, वह समयावधि है जो किसी संगठन द्वारा निवल वर्तमान देयता और एसेट को नकद में बदलने के लिए इस्तेमाल की जाती है. यह प्रभावशाली तरीके से शॉर्ट-टर्म और उस पूरी साइकिल (जिसकी गणना दिनों में की जाती है) में लिक्विडिटी की स्थिति को प्रबंधित करने की संगठनात्मक क्षमता का संकेत है, जो मूल रूप से प्रॉडक्ट को बनाने हेतु मटीरियल खरीदने और उन्हें बेचकर नकद आय अर्जित करने के बीच की समयावधि है.

यह कार्यशील पूंजी चक्र, जितना छोटा होगा, कंपनी को अपनी ब्लॉक हुई राशि को मुक्त करने में उतनी ही आसानी होगी. साइकिल लंबी होने की स्थिति में पूंजी, आमतौर पर ऑपरेशनल साइकिल में रिटर्न अर्जित किए बिना फंस जाती है बिज़नेस हमेशा अल्पकालिक अवधि में तरलता बढ़ाने के लिए इस कार्यशील पूंजी चक्र को कम करने का प्रयास करते हैं.


कार्यशील पूंजी के लिए फॉर्मूला
कार्यशील पूंजी का फॉर्मूला नीचे दिया गया है:

कार्यशील पूंजी = वर्तमान एसेट - वर्तमान देनदारियां
कार्यशील पूंजी का अनुपात इस बात का संकेतक होता है कि क्या लघु अवधि के लोन को प्रबंधित करने के लिए किसी संगठन के पास लघु अवधि हेतु पर्याप्त एसेट है या नहीं. 1 से कम अनुपात नकारात्मक कार्यशील पूंजी का संकेतक है जबकि सकारात्मक/पर्याप्त कार्यशील पूंजी आमतौर पर 1.2 और 2.0 के बीच होती है. 2 से अधिक कोई भी वस्तु अक्सर अतिरिक्त एसेट की ओर संकेत करती है जिसे कंपनी द्वारा इन्वेस्ट नहीं किया जा रहा होता है और इसलिए वह छूटे हुए अवसर के रूप में समझा जाता है.

अगर मौजूदा एसेट मौजूदा लोन से ज़्यादा नहीं होता तो ऑर्गनाइज़ेशन को परेशानी हो सकती है. कार्यशील पूंजी किसी भी संगठन की दक्षता के बारे में भी बताती है. वह धनराशि जो मार्केट में, इन्वेंटरी में या अभी तक पेमेंट नहीं करने वाले कस्टमर के हाथ में फंसी है, देनदारों के सेटलमेंट के समय उसे गणना में शामिल करने योग्य नहीं माना जाएगा.

संदर्भ: कार्यशील पूंजी के लिए फॉर्मूला
 

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MSME क्या है?

MSME का मतलब है माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम). इसे भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) के 2006 के अधिनियम के साथ जारी किया गया था. इस अधिनियम के अनुसार, MSME माल और वस्तुओं के उत्पादन, प्रोसेसिंग या संरक्षण करने वाले उद्यम हैं. आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण, यह क्षेत्र देश के GDP में से लगभग तैंतीस प्रतिशत का योगदान करता है और लगभग 110 मिलियन की आबादी के लिए रोजगार पैदा करता है.

भारत में MSME

यह देश के सामाजिक व आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि इनमें से कई बिज़नेस ग्रामीण क्षेत्रों में काम करते हैं. सरकार की 2018-2019 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 6 लाख से अधिक MSME मौजूद हैं.

शुरूआती दौर में, MSME को दो कारकों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता था - प्लांट/मशीनरी में इन्वेस्टमेंट और बिज़नेस का वार्षिक टर्नओवर. लेकिन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने हाल ही में इन दोनों कारकों को एक में ही जोड़कर वर्गीकरण को बदल दिया है.

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