अपने EPF बैलेंस को NPS में ट्रांसफर करने से कई टैक्स लाभ मिलते हैं, लेकिन इसमें कुछ टैक्स प्रभाव भी होते हैं जिन पर ट्रांसफर करने से पहले विचार किया जाना चाहिए.
1. NPS योगदान पर टैक्स लाभ
NPS में योगदान इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD(1) के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स कटौती के लिए योग्य हैं, जो सेक्शन 80C के तहत कुल लिमिट का हिस्सा है. इसके अलावा, सेक्शन 80CCD(1B) विशेष रूप से NPS योगदान के लिए ₹50,000 तक की अतिरिक्त टैक्स कटौती प्रदान करता है, जिससे NPS टैक्स के दृष्टिकोण से एक अत्यधिक आकर्षक निवेश विकल्प बन जाता है.
2. EPF बैलेंस ट्रांसफर पर टैक्सेशन
आपके EPF बैलेंस को NPS में ट्रांसफर करने पर टैक्स नहीं लगता है. हालांकि, अगर आप EPF बैलेंस ट्रांसफर करने के बजाय उसे निकालने का विकल्प चुनते हैं, तो यह राशि सेवा की अवधि के आधार पर टैक्स के अधीन होगी. अगर आपकी सेवा पांच वर्ष से अधिक है, तो राशि टैक्स-फ्री है; अगर यह पांच वर्ष से कम है, तो निकासी पर आय के रूप में टैक्स लगाया जाएगा.
3. NPS रिटर्न पर टैक्स
NPS इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न टैक्स के अधीन है, हालांकि उन्हें अनुकूल टैक्स ट्रीटमेंट का लाभ मिलता है. NPS पर अर्जित ब्याज पर लागू इनकम टैक्स दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता है, लेकिन NPS संचित कॉर्पस के लिए मेच्योरिटी पर टैक्स-फ्री रिटर्न प्रदान करता है. लेकिन, NPS कॉर्पस का 60% रिटायरमेंट पर निकाला जा सकता है, और यह हिस्सा टैक्स-फ्री है. शेष 40% का उपयोग एन्युटी खरीदने के लिए किया जाना चाहिए, जो एन्युटी टैक्स के अधीन है.
4. एन्युटी आय पर टैक्स
जब आप एन्युटी खरीदने के लिए अपने NPS कॉर्पस का 40% निकालते हैं, तो आपको प्राप्त एन्युटी आय लागू टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के अधीन होगी. एन्युटी आय को नियमित आय माना जाता है और उसके अनुसार टैक्स लगाया जाता है.
5. कैपिटल गेन टैक्स पर विचार
NPS आपको इक्विटी, बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज़ के मिश्रण में निवेश करने की अनुमति देता है, इसलिए इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर अर्जित कोई भी कैपिटल गेन टैक्स के अधीन होता है. इक्विटी निवेश पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर एक वर्ष की होल्डिंग अवधि के बाद 10% पर टैक्स लगाया जाता है, जबकि शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 15% टैक्स लगाया जाता है.
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