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फिक्स्ड बनाम फ्लोटिंग ब्याज़ दर

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फिक्स्ड या फ्लोटिंग ब्याज़ दरें - कौन से चुनना चाहिए?

पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करते समय अक्सर उधारकर्ता, प्रदान किए जाने वाले फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज़ दरों के बीच भ्रमित हो जाते हैं. ब्याज़ दर का चुनाव दो महत्वपूर्ण फाइनेंशियल पहलुओं, देय EMI की राशि और पुनर्भुगतान योजना को प्रभावित करता है.
इसलिए उपयुक्त विकल्प पर निर्णय करने के लिए, पर्सनल लोन जैसे एडवांस पर फिक्स्ड बनाम फ्लोटिंग ब्याज़ दरों का आकलन करके इस अंतर को समझें.

फिक्स्ड ब्याज़ दर क्या है?

फिक्स्ड लेंडिंग सुविधा के तहत, लोन की पूरी अवधि के दौरान निर्धारित दर पर ब्याज़ लिया जाता है. फिक्स्ड ब्याज़ दर का विकल्प चुनने पर, पूरी अवधि के लिए ब्याज़ समान रहता है.

फ्लोटिंग ब्याज़ दर क्या है?

फ्लोटिंग ब्याज़ दरों (जिसे वेरिएबल ब्याज़ दर भी कहा जाता है) के तहत, ब्याज़ दर रेपो रेट में बदलाव के साथ आवधिक संशोधन के अधीन होती है, जो लेंडिंग बेंचमार्क RBI द्वारा निर्धारित है.

लेंडर रेपो रेट में स्प्रेड या मार्जिन जोड़ते हैं और RLLR या रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट के नाम से जानी जाने वाली ब्याज़ दर को निर्धारित करते हैं. रेपो रेट में कोई भी बदलाव होने से उधारकर्ताओं को दी गई लोन और एडवांस के लिए लागू ब्याज़ दर में बदलाव होती है.

हालांकि ऐसे लोन की EMI अपरिवर्तित रह सकती है, फिर भी फ्लोटिंग लेंडिंग रेट वेरिएंट के तहत ब्याज़ दर के एडजस्टमेंट से कुल पुनर्भुगतान देयता में वृद्धि के कारण लोन की अवधि बढ़ सकती है.
फिक्स्ड या फ्लोटिंग ब्याज़ दर में से बेहतर का चुनाव करना उधारकर्ता पर निर्भर करता है.
निम्न जानकारी की मदद से आप फिक्स्ड बनाम वेरिएबल ब्याज़ दर के बीच चुनने में मदद पा सकते हैं.

फिक्स्ड बनाम फ्लोटिंग ब्याज़ दरें - तुलना

निम्न परिस्थितियों में फिक्स्ड लेंडिंग रेट का विकल्प चुनना बेहतर होता है –


  • जब उधारकर्ता अपनी कुल पुनर्भुगतान देयता को बनाए रखना चाहते हैं और शुरुआत में आकलन किए गए EMI और उनके पुनर्भुगतान शिड्यूल में कोई बदलाव नहीं चाहते हैं.
  • अगर वे लेंडिंग दरों से संबंधित मार्केट ट्रेंड में बदलाव के साथ जुड़े जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं हैं.

फिक्स्ड ब्याज़ दरों से बेहतर फाइनेंशियल योजना बनाई जा सकती हैं, क्योंकि पुनर्भुगतान अवधि बदली नहीं जाती है.

फ्लोटिंग ब्याज़ दरें उपयुक्त हो सकती हैं, अगर –

  • उधारकर्ता रेपो रेट कट का ट्रेंड समझते हैं. इसमें पुनर्भुगतान देयता को देखने की ज़रूरत होती है, क्योंकि ब्याज़ समय के साथ कम होता है.
  • इससे आय में वृद्धि की संभावना होती है. अपनी लोन देयता को प्री-पे करने का विकल्प चुनने से कुल पुनर्भुगतान राशि और प्री-पेमेंट शुल्क, दोनों पर महत्वपूर्ण बचत करने में मदद मिल सकती है.

फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज़ दरों के बीच बेहतर विकल्प का चुनाव, लोन के लिए अप्लाई करते समय आपकी उपयुक्तता पर निर्भर करता है. अगर एक लेंडिंग रेट के लाभ दूसरे को ओवरराइड करते हैं, तो न्यूनतम फीस के भुगतान पर ब्याज़ दर कन्वर्ज़न का विकल्प चुनें.