श्री. कमलनयन बजाज (1915 – 1972)

श्री. श्री जमनालाल बजाजे के बड़े बेटे कमलनयन बजाज (23 जनवरी 1915 – 1 मई 1972). के कंधों पर कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद कमलनयन जी अपने पिता के बिज़नेस और सोशल सर्विस में सहायता करने के लिए भारत लौट आए.

खाने, बिजली, कच्चे माल, टेक्नोलॉजी और विदेशी मुद्रा की कमी, बैंकिंग प्रणाली में उथल-पुथल और लाइसेंस राज का आगमन - ये कुछ ही ऐसी चुनौतियां थीं, जिनका सामना उद्यमियों को 1940s से लेकर ‘70s के शुरुआती दौर में करना पड़ा. इन सब की चिंता किए बिना, कमलनयन बजाज चुपचाप अपना काम करते रहे. 1942 में, बजाज ग्रुप ने 200 से कम कर्मचारियों के साथ लगभग रु. 1 करोड़ की बिक्री की थी, उस समय इसके पास कुछ जिनिंग और प्रेसिंग मिलें और कुछ कर्ज था.

उनका पहला कार्य कर्ज से निपटना था. विभाजन के दौरान, समूह ने अपनी प्रापर्टी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खो दिया था. उन्होंने नई शुरुआत की. अगले तीन दशकों में, उन्होंने सोलह कारखाने बनाए और पांच प्राप्त किए. 1965 तक, बजाज ग्रुप देश का 19वां सबसे बड़ा बिज़नेस हाउस था. आज इसकी मार्केट कैप लगभग रु. 1,30,000 करोड़ है जिसमें रु. 8,000 करोड़ से अधिक का प्री-टैक्स लाभ है. बजाज ऑटो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मोटरसाइकिल निर्माता है. दो बजाज आलियांज़ इंश्योरेंस कंपनियां और बजाज फाइनेंस, एक कंज्यूमर और एसएमई फाइनेंस कंपनी, अपने संबंधित क्षेत्रों में अग्रणी हैं.

इससे भी अधिक महत्व यह रखता था कि, कमलनायन बजाज ने समूह में मूल्यों और नैतिकता को जोड़कर एक मजबूत नींव रखी. यह उनके उत्तराधिकारीओं द्वारा एक विरासत है - और बजाज समूह के वास्तुकार को एक योग्य श्रद्धांजलि है.